यूपी के मंत्रियों को इंपोर्ट कर गुजरात का रण जीतने की तैयारी में बीजेपी

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लखनऊ, आशीष पाण्डेय: अपनी साख को बचाने के लिए ही बीजेपी ने गुजरात चुनाव से यूपी के मंत्रियों को इंपोर्ट कर चुनाव प्रचार में लगाना शुरू कर दिया है। शायद यह बड़ा कारण है कि योगी बार बार गुजराज की यात्रा कर रहे हैं। सांवरकुंडला और अमरेली की सभाएं रात में हुईं। इन दोनों सभाओं में योगी को सुनने के लिए भारी भीड़ जुटी। योगी ने भीड़ से खचाखच भरे मैदान में मोबाइल से टार्च जलाकर भाजपा प्रत्याशियों के लिए समर्थन मांगा। अमरेली में बुधवार की रात 9.30 बजे उन्हें सुनने के लिए हजारों लोग मौजूद थे। वे मोदी-योगी के नारे लगा रहे थे। रास्ते में खड़ी भीड़ जय श्रीराम के नारे लगा रही थी।

गुरूवार की सुबह योगी आदित्यनाथ ने सोमनाथ मंदिर में दर्शन करने के बाद चुनाव अभियान शुरू किया। वह गुजरात के राजकोट, भावनगर, आणंद, सुरेन्द्र नगर और बड़ोदरा जिले में भाजपा प्रत्याशियों के समर्थन में सभाओं  को संबोधित किया। 8 दिसंबर को योगी शायद लखनऊ लौट आएं। योगी के गुजरात दौरे की चर्चा यहां पर कई कारणों से जरूरी हो जाती है। इस चुनावी रण को जीतने के लिए भाजपा व कांग्रेस हर संभव दांव लगा रहे हैं। 2019 के लोकसभा चुनाव के कारण गुजरात में बीजेपी अपनी साख बनाए रखकर विपक्ष को कड़ा संदेश देना चाहती हैं। वहीं कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी के पास अब पार्टी को फिर से खड़ा करने की बड़ी जिम्मेदारी है।

बीजेपी की लोकप्रियता में गिरावट 
पिछले 19 सालों से गुजरात में भाजपा की सरकार है, जिसके कारण गुजरात को भाजपा का गढ़ जाता है। पिछले 3 विधानसभा चुनावों से भाजपा नरेंद्र मोदी को ही गुजरात के मुख्यमंत्री का चेहरा बनाकर चुनाव लड़ती रही है। अबकी बार नरेंद्र मोदी सीएम नहीं बल्कि पीएम के रूप में ही इस चुनाव में गुजरातियों के बीच हैं। बीजेपी के शीर्ष नेता इस बात को समझ रहे हैं कि नरेंद्र मोदी के प्रधानमंत्री बनने के बाद से गुजरात में भाजपा की लोकप्रियता में गिरावट हुई है। जिसके कारण है कि बीजेपी ने तकरीबन सभी शीर्ष नेताओं की फौज को चुनाव प्रचार में लगाया है। मोदी-शाह-योगी लगातार रैलियां कर रहे हैं। 
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हिंदुत्व का चेहरा बनेंगे योगी आदित्यनाथ
मंदिर-मंदिर जाकर नरेंद्र मोदी ने अपने साथ-साथ राहुल गांधी को भी हिंदूत्व के घेरे में ला दिया है। जिसके कारण राहुल गांधी से भी उनके हिंदू होने का सबूत मांगा जाने लगा। स्पष्ट तौर पर देखा जा सकता है कि एक बार फिर हिंदूत्व को मुद्दा बनाकर बीजेपी चुनावी समर में दांव लगा रही है। मोदी का मंदिरों में जाना इसका बहुत बड़ा उदाहरण है। यह तो किसी से भी नहीं छिपा है कि बीजेपी गुजरात विधानसभा चुनावों में विकास के साथ हिंदूत्व को मुख्य मुद्दा बना दिया है। गुजरात एक हिन्दू बाहुल्य आबादी वाला राज्य है और यहाँ की 89 फीसदी आबादी हिन्दू है। ऐसे में भाजपा अपने कोर वोट बैंक माने जाने वाले हिन्दुओं को साधने के लिए हिंदुत्व कार्ड भी खेल रही है। उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को इसीलिए गुजरात चुनाव में स्टार कंपेनर बनाया गया है। बीजेपी का मानना है कि योगी द्वारा यूपी को भगवा मय बनाने की कवायद को गुजरात के हिंदूओं ने काफी पसंद किया है। साथ ही योगी आदित्यनाथ की कट्टर हिंदूवादी नेता की छवि भी है। जिसका उदाहरण यूपी सरकार द्वारा लिए गए कुछ फैसलों पर इसका स्पष्ट रूप से दिखता है। योगी के इस छवि को बीजेपी गुजरात में जमकर भुना रही हे।
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कुर्मी वोटरों को साधेंगे स्वतंत्र देव
गुजरात के लिए बीजेपी ने केवल यूपी के सीएम को ही नहीं बल्कि यहां के मंत्रियों को भी इंपोर्ट किया है। योगी के बाद दूसरा नाम स्वतंत्र देव सिंह का है। हालांकि स्वतंत्र देव के पास चुनाव मैनेजमेंट का काफी पुराना अनुभव है जिसका लाभ तो बीजेपी ले ही रही है साथ ही उनके माध्यम से ओबीसी और दलित वोटरों को साधने की कोशिश में है। गुजरात में कुर्मी वोटरों का बड़ा तबका मौजूद है और उसे साधने के लिए भाजपा योगी सरकार के मंत्री स्वतंत्र देव को गुजरात बुला सकती है। स्वतंत्र देव को संगठन में काम करने का लम्बा अनुभव है और योगी सरकार में शामिल होने से पूर्व उनके कन्धों पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की रैलियों और सभाओं की जिम्मेदारी थी। गुजरात भाजपा विधानसभा चुनावों में स्वतंत्र देव की संगठन क्षमता का लाभ उठाएगी। इसके अतिरिक्त भाजपा उत्तर प्रदेश की क्षेत्रीय पार्टी अपना दल की प्रमुख अनुप्रिया पटेल को भी गुजरात में प्रचार कार्यक्रम में उतार सकता है। अनुप्रिया पटेल मोदी मन्त्रिमण्डल में मंत्री हैं। गुजरात में कुर्मी वोटरों को लुभाने के लिए वह भाजपा का हथियार बन सकती हैं।



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