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राष्ट्रीय स्वच्छ गंगा मिशन के अधिकारियों की जांच में हरिद्वार में पाई गई घोर अनियमितता

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राष्ट्रीय स्वच्छ गंगा मिशन के अधिकारियों की जांच में हरिद्वार में पाई गई घोर अनियमितताराष्ट्रीय स्वच्छ गंगा मिशन के अधिकारियों की जांच में हरिद्वार में पाई गई घोर अनियमितताराष्ट्रीय स्वच्छ गंगा मिशन के अधिकारियों की जांच में हरिद्वार में पाई गई घोर अनियमितता

देहरादून/ब्यूरो। हरिद्वार सीवरेज प्लांट के संचालन में घोर अनियमितता पाये जाने पर शासन ने हरिद्वार जल संस्थान के कनिष्ठ अभियंता को कार्यमुक्त कर दिया है,  सहायक अभियंता को निलंबित करते हुए उन्हें चार्जशीट दी गई है जबकि ठेकेदारा का कांटेक्ट निरस्त करते हुए उसे ब्लैकलिस्टेट कर दिया गया है। गौरतलब है कि 21 व 22 दिसंबर 2017 को राष्ट्रीय स्वच्छ गंगा मिशन (एनएमसीजी) के अधिकारियों द्वारा हरिद्वार की सीवरेज परियोजनाओं का निरीक्षण किया गया।

इस निरीक्षण के दौरान जगजीतपुर स्थित 27 एनएलडी एचटीपी ऑकिक्रशील पाया गया ओर इसके क्लोरीन कॉटेक्ट टैंक में पानी रुका होने के कारण भारी मात्रा में मच्छर पाए गए। इसका मतलब यह था कि प्लांट में क्लोरीन का मिश्रण अपर्याप्त था। इसी तरह सीवेज पंपिंग स्टेशन पीडब्लयूडी नाले का निरीक्षण करने पर सीवेज पंपिंग स्टेशन में स्थापित चार पंपों में से सिर्फ एक पंप सक्रिय पाया गया।

इसके साथ ही वहां बनाई गई ड्रेन लीक हो रही थी जिस कारण सीवर का गंदा पानी सीधे अपर गंगा कैनाल में जा रहा था। इसे घोर लापरवाही माना गया और निरीक्षण करने वाले अधिकारियों की रिपोर्ट के आधार पर शासन ने शुक्रवार को जल संस्थान हरिद्वार के सहायक अभियंता अब्दुल रशीद को निलंबित कर दिया है और जूनियर इंजीनियर रवि कुमार को कार्यमुक्त कर दिया गया है। रवि कुमार उपनल के माध्यम से  जल संस्थान में समायोजित थे। प्रभारी सचिव अरिवंद  सिंह हयांकी की ओर से रवि कुमार की संबद्धता समाप्त करने के लिए उपनल को लिखा गया है। इसके साथ ही सहायक अभियंता को चार्जशीट भेजी गई है। और उन्हें 15 दिनों के अंदर जवाब देने का समय दिया गया है।

शासन की कार्रवाई यहां पर खत्म नहीं हुई। उस ठेकेदार को भी कार्रवाई की जद में लाया गया है जिसने सीवर ट्रीटमेंट प्लांट की निर्माण किया था। सचिव अरविंद सिंह हयांकी के आदेश पर संयत्रों के संचालन व रखरखाव हेतु जिम्मेदार ठेकेदार मेसर्स यूपीईईएल इंजीनियर का कांट्रेट तल्काल प्रभाव से निरस्त कर दिया गया है। साथ में शासन ने इस कंपनी को ब्लैकलिस्टेट भी कर दिया है। यह सारी कार्रवाई राज्यपाल के अनुमोदन के बाद शासन की ओर से हुई है। 

 

 

 



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