मां-बेटी की लड़ाई में खत्म हो गया ‘अपना दल’ का वजूद

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वाराणसी: यूपी के आगामी विधानसभा चुनाव के पहले ही ‘अपना दल’ का राजनीतिक वजूद खत्म हो गया। जिला निर्वाचन आयोग ने सोमवार को इस दल को अमान्य घोषित कर दिया। इसके साथ ही आयोग ने जिलों को निर्देश जारी करते हुए कहा कि अब यह दल मान्य नहीं रहा। लिहाजा उनके पदाधिकारियों को किसी तरह की छूट न दी जाए। संयुक्त निर्वाचन अधिकारी जितेंद्र प्रताप सिंह ने निर्वाचन आयोग के निर्देश को सोमवार को जारी कर दिया। इस परिपत्र में निर्वाचन आयोग के हवाले से कहा गया है कि रजिस्ट्रीकृत अमान्यता प्राप्त राजनैतिक दल, ‘अपना दल’ के पदाधिकारियों के मध्य आंतरिक विवाद के कारण आयोग के अभिलेख में आज के दिन उक्त दल का कोई अधिकृत पदाधिकारी नहीं है। आयोग के अभिलेख में इस दल के पदाधिकारियों की अनुमोदित सूची न होने के कारण किसी के द्वारा इस पार्टी का फार्म ए तथा फार्म बी देने पर स्वीकार नहीं किया जाएगा।

अपना दल का रजिस्‍ट्रेशन कैंसिल करने की याचिका खारिज
बता दें कि बीते 5 दिसंबर को अपना दल का रजिस्ट्रेशन कैंसिल करने के लिए दायर की गई याचिका को इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ बेंच ने खारिज कर दिया था। यह याचिका अपना दल की अध्यक्ष कृष्णा पटेल ने दायर की थी। याचिका खारिज करते हुए हाईकोर्ट ने कृष्‍णा पटेल को निर्वाचन आयोग में जाने को कहा था। 

अनुप्रिया और मां कृष्णा पटेल में चल रहा था विवाद 
गौरतलब है कि बेटी अनुप्रिया और मां कृष्णा पटेल में अपना दल के स्वामित्व को लेकर जंग चल रही थी। जहां अनुप्रिया पटेल अपने आप को पार्टी का उत्तराधिकारी मानती हैं, वहीं मां कृष्णा पटेल का कहना है कि वह पार्टी की अध्यक्ष हैं। कृष्णा पटेल का कहना है कि अनुप्रिया को पार्टी से बहुत पहले निकाला जा चुका है लिहाजा अब उनका पार्टी से कोई लेना देना नहीं है। धीरे-धीरे यहीं से पार्टी के टूटन की प्रक्रिया शुरू हो गई। देखते-देखते मां-बेटी में ऐसी दूरियां बढ़ीं कि मामला भारत निर्वाचन आयोग तक पहुंचा और आयोग को बड़ा फैसला लेना पड़ा जिसके चलते डॉ. सोने लाल पटेल द्वारा खड़ा किया गया बड़ा राजनीतिक घराने के वजूद खत्म हो गया।

सोनेवाल ने मायावती को टक्कर देने के लिए बनाया ‘अपना दल’
डॉ. सोनेवाल पटेल कभी कांशीराम के बेहद करीबी माने जाते थे। जब बसपा पर मायावती का अधिपत्य हुआ तो सोनेवाल ने कांशीराम से किनारा कर लिया और मायावती को टक्कर देने के लिए ‘अपना दल’ का गठन किया। अपना दल के गठन के लिए डॉ. सोनेलाल पटेल ने पहले कुर्मी समुदाय के बीच जनसंपर्क किया और फिर नवंबर 1994 में लखनऊ के बेगम हजरत महल पार्क में एक रैली बुलाई थी। तत्कालीन लोगों का मानना है कि इस रैली में कुर्मी समुदाय ने अपनी ताकत का अहसास करा दिया था और रणनीतिकारों को साफ लग गया था कि यूपी में एक और जातीय क्षेत्रीय पार्टी का उदय होने वाला है। इसके 11 महीने बाद 1995 में सरदार पटेल जयंती पर कुर्मी समाज की रथ यात्रा को खीरी में रोका गया। फिर नवंबर में बेगम हजरत महल पार्क में रैली पर रोक लगाई गई। रैली बारादरी पार्क में हुई। इसी रैली में अपना दल के गठन की घोषणा की गई। उसके बाद से सोनेलाल पटेल जब तक जिंदा रहे तब तक पार्टी फलती फूलती रही।

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