सरकार भी नहीं रोक पाई रेल हादसे, अब तक हो चुकी हैं इतनी दुर्घटनाएं

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सरकार भी नहीं रोक पाई रेल हादसे, अब तक हो चुकी हैं इतनी दुर्घटनाएंसरकार भी नहीं रोक पाई रेल हादसे, अब तक हो चुकी हैं इतनी दुर्घटनाएंसरकार भी नहीं रोक पाई रेल हादसे, अब तक हो चुकी हैं इतनी दुर्घटनाएं

लखनऊः उत्तर प्रदेश में रेलवे की लापरवाही से हो रहे हादसे रुकने का नाम ही नहीं ले रहे हैं। बीती रात कैफियात एक्सप्रेस औरैया जिले में एक डंपर से टकराकर हादसे का शिकार हो गई। जिसमें 78 लोग घायल हो गए। पिछले 5 दिनों में 2 बड़े ट्रेन हादसे रेलवे की सुरक्षा पर सवाल खड़े करते हैं।

जानकारी के मुताबिक ज्यादातर हादसे रेलवे की लापरवाही से हुए हैं। इससे पहले 19 अगस्त को मुजफ्फरनगर के खतौली में कलिंग उत्कल एक्सप्रेस दुर्घटनाग्रस्त हो गई। इस हादसे में 23 यात्रियों की मौत हो गई जबकि सैकड़ों अन्य घायल हो गए।

7 मार्च, 2017 को मध्य प्रदेश के जबरी रेलवे स्टेशन के पास भोपाल-उज्जैन पैसेंजर ट्रेन में बम फटा था, जिसमें 10 लोग घायल हो गए थे। वहीं 21 जनवरी 2017 में कुनेरू के पास जगदलपुर-भुवनेश्वर हीराखंड एक्सप्रेस पटरी से उतरी गई थी। इसमें 40 से ज्यादा की मौत और 68 घायल हो गए थे।

आंकड़ों पर गौर करें तो सुरेश प्रभु के कार्यकाल में भारतीय रेल में डिरेलमेंट के मामलों में 30 फीसदी बढ़ोतरी हुई हैं। पिछले 5 साल में 2012-13  69 हादसों में 49 डिरेलमेंट यानि ट्रेन के पटरी से उतरने के थे।

-2013-14 में 71 हादसों में 53 डिरेलमेंट के मामले।

-2014-15 में कुल 85 रेल हादसों में 63  डिरेलमेंट के मामले थे।

-2015-16 में 78 हादसों में 65 बार डिरेलमेंट हुआ।



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