विकास को तरसती राम की अयोध्या को ही बना दिया गया विवादित

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विकास को तरसती राम की अयोध्या को ही बना दिया गया विवादितविकास को तरसती राम की अयोध्या को ही बना दिया गया विवादितविकास को तरसती राम की अयोध्या को ही बना दिया गया विवादित

लखनऊ(आशीष पाण्डेय) : मंगलवार को जिस तरह कपिल सिब्बल ने सुप्रीम कोर्ट से अयोध्या कांड की सुनवाई को जुलाई 2019 के बाद शुरू करने की सिफारिश की है उससे यह तो साफ हो गया है कि कांग्रेस को इस बात डर है कि बीजेपी एक बार फिर इस मुद्दे का चुनावी लाभ लेने से पीछे नहीं रहेगी। जबकि इसके उलट नरेंद्र मोदी की अगुवाई में बीजेपी ने राम मंदिर के मुद्दे को पीछे कर विकास को प्रमुखता देने की बात कही थी। जिसके कारण कई सालों तक बीजेपी के एजेंडा में अयोध्या विवाद मुख्यधारा में शामिल नहीं हुआ। राजनीति समीक्षकों ने जब बीजेपी से सवाल किया की क्या उनकी सबसे बड़ी राजनीतिक पूंजी खत्म हो चुकी है तो बीजेपी के आलाकमान तक ने इसका खंडन किया। बीजेपी नेताओं ने दावा किया जिस तरह राम मंदिर उनके मुख्य एजेंडे शामिल है वही स्थान विकास को दिया गया है।

असल में यही कारण था भी कि बीजेपी की सरकार बनने के बाद जिस तरह की चर्चा राम मंदिर पर होनी चाहिए थी वो नहीं हुई। लेकिन विकास का जो राग पीमए मोदी व बीजेपी अलाप रही है उसकी तान भी राम नगरी तक नहीं सुनाई दी है। अयोध्या में विकास की योजनाओं ने आखं मूंद रखी है। हद तो यह हो गई कि रामजन्म भूमि के पास केवल 2.77 एकड़ जमीन ही विवादित है और उसी पर तमाम मुकदमे चल रहे हैं। ऐसे में इस विवादित भूमि पर विकास नहीं हुआ यह तो समझ में आता है लेकिन अब लग रहा है कि इस राजनीतिक साजिश की चपेट में आकर पूरी राम नगरी ही विवादित हो गई है।


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2019 चुनाव में होगा मुख्य मुद्दा
बीजेपी लाख सफाई दे लेकिन 2019 में होने वाला आम चुनाव का मुख्य एजेंडा राम जन्म भूमि ही होगा। बाबरी विध्वंस के ठीक 25 वर्ष बाद यह मामला धीरे धीरे ही सही लेकिन अब देश की राजनीति का केंद्र बिंदू बन गया है। जिस रूप में में यह मामला अब सबके सामने है उससे तो यह तय है कि 2019 के आम चुनाव में इसका सबसे अहम चुनावी मुद्दा होगा। यूपी में योगी आदित्यनाथ सीएम हैं, सभी जानते हैं कि योगी हिंदूत्व के इस मुद्दे पर कितने आक्रामक रहते हैं। हाल फिलहाल तो यह मामला सुप्रीम कोर्ट में है और इसकी पूरी संभावना है कि 2018 के अंत से पहले अयोध्या विवाद से जुड़े सालों पुराने मामले में अंतिम फैसला आ जाएगा। ऐसे में फैसला जो भी हो इस पर राजनीति होनी तय है।

क्या पूरी अयोध्या ही विवादित है?
पांच दशकों के अंदर धर्म के नाम जितनी सियासत अयोध्या ने झेली है वो किसी से छूपी हुई नहीं है। इतने वर्षों में सरकारी स्तर पर इस तरह की कोई योजना नहीं है कि मंदिर क्षेत्र में विकास के लिए साधू संतों की भी भूमिका तय की जा सके। जबकि अयोध्या के विकास का खाका खींचते वक्त साधू-संतों की भूमिका तय की जानी चाहिए। पर्यटकों के ठहरने के समुचित व्यवस्था तक नहीं है। धर्मशालाएं अयोध्या के भीतर हैं उनके रेट बेहद ज्यादा हैं। तीर्थाटन पर आने वाले लोग आम तौर पर इतना खर्च नहीं करते तो राम की पैड़ी, मंदिरों के परिसर और दूसरे घाटों को ही अपना डेरा बना लेते हैं। भले ही अयोध्या की पहचान पिछले कुछ दशकों से विवादित ढांचे में सिमट कर रह गई हो, लेकिन यहां तीर्थयात्रियों की आमद कम नहीं है। लोग यहां आते तो हैं, लेकिन एक अदद पार्किंग तक की व्यवस्था नहीं है। शहरी इलाकों में सीवर नहीं पड़ा है। सीवर की तो बात ही दूर दुरुस्त ड्रेनेज सिस्टम तक नहीं है। नतीजा यह है कि बजबजाती हुई नालियां पर्यटकों को बिल्कुल पसंद नहीं आतीं। मंदिरों से निकलने वाला ड्रेन भी सीधे सरयू में गिरता है। इससे सरयू भी मैली होती है।

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कांग्रेस में कहां है राम मंदिर मुद्दा
यह तो सभी जानते हैं कि कांग्रेस के लिए हमेशा राम मंदिर मुद्दा कमजोर कड़ी रहा है। बीजेपी के इस अभेद दीवार को भेदना किसी भी कांग्रेसी के लिए अकल्पनीय हो गया है। और जब तक यह बात उन्हें समझ में वो राजनीति गलियारों के अंतिम छोर पर आकर सिमट गई। यही कारण रहा कि गुजरात चुनाव में राहुल हर मंदिर की चौखट चूम कर हिंदूत्व विरोधी धारणा को दूर करने में लगे हुए है। लेकिन अयोध्या की बात गुजरात चुनाव पर भी भारी है। अमित शाह ने भी राहुल से सीधे सवाल किया कि है वों बताएं की कांग्रेस राम मंदिर मुद्दे को किस रूप में लेती है। फिलहाल कांग्रेस न हिंदुओं को नाराज करने का जोखिम ले सकती है और ना ही मुस्लिम को नजर अंदाज ही कर सकती है। जबकि बीजेपी कांग्रेस की इसी कमजोरी पर बार बार प्रहार कर रही है। हालांकि कांग्रेस सहित कई दलों ने 2014 के आम चुनाव में बीजेपी पर इस नारे के साथ तंज कसा था, ‘मंदिर वहीं बनाएंगे लेकिन डेट नहीं बताएंगे।’ पार्टी इस बार इस मुद्दे पर डेट बताने की स्थिति में खुद को देख रही है। बीजेपी का मानना है कि 2019 से पहले राम मंदिर का निर्माण हर हाल में शुरू हो जाएगा और इसे वह हिंदुत्व की बड़ी जीत के रूप में पेश करेगी।
 
 



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