नहीं थम रहा GST का विरोध, टिम्बर व्यापारियों समेत सिख समुदाय भी विरोध में हुआ शामिल

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नहीं थम रहा GST का विरोध, टिम्बर व्यापारियों समेत सिख समुदाय भी विरोध में हुआ शामिलनहीं थम रहा GST का विरोध, टिम्बर व्यापारियों समेत सिख समुदाय भी विरोध में हुआ शामिलनहीं थम रहा GST का विरोध, टिम्बर व्यापारियों समेत सिख समुदाय भी विरोध में हुआ शामिल

कानपुर (अंबरीश त्रिपाठी): प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की ‘एक देश एक टैक्स’ की स्किम का विरोध थमने का नाम नहीं ले रहा है। जिसके विरोध की चिंगारी ने अब उत्तर प्रदेश की औद्योगिक नगरी कानपुर को भी आगोस में ले लिया है। टिम्बर व्यापारियों समेत सिख समाज ने भी विरोध करना शुरू कर दिया है। जहां एक तरफ टिम्बर व्यापारियों ने जिलाधिकारी के माध्यम से पीएम को एक पत्र सौंपकर समाधान की मांग की तो दूसरी तरफ सिख समुदाय के लोगों ने भी हाथों में रोटी लेकर प्रदर्शन करते हुए स्वर्ण मंदिर में होने वाले लंगर को जीएसटी से मुक्त करने की आवाज उठायी। 

टिम्बर व्यापारियों ने जिलाधिकारी को सौंपा ज्ञापन 
एक राष्ट्र एक टैक्स की बात टिम्बर व्यापारियों के साथ सही नहीं बैठ रही है। जिसमें मंडी समिति व ट्रान्जिट शुल्क अलग से लिया जा रहा है। जिसको लेकर विरोध के स्वर उठने लगे हैं। कुछ इसी की कड़ी में टिम्बर व्यापारी जिलाधिकारी कार्यालय पहुँचे और प्रधानमंत्री, वित्तमंत्री समेत मुख्यमंत्री को संबंधित ज्ञापन सौंपा। जिसमें जीएसटी के अलावा अलग से टैक्स लिये जाने का आरोप लगाया गया है। 

टैक्स की दोहरी मार पड़ रही-गुरुजिंदर सिंह 
जिसका जिक्र करते हुए टिम्बर उद्योग व्यापार मंडल के प्रदेश महामंत्री सरदार गुरुजिंदर सिंह ने बताया कि देश में जीएसटी लागू हुआ है वह ठीक हैं लेकिन देश के प्रधानमंत्री व वित्तमंत्री द्वारा एक राष्ट एक टैक्स का नारा लगाया गया था। लेकिन कानून लागू होने के बाद जब हकीकत सामने आयी तो टिम्बर व्यापारियों पर टैक्स की दोहरी मार पड़ रही है। जिसके तहत अब इस व्यापार से जुड़े व्यापारियों को ढाई प्रतिशत मंडी समिति व 5 प्रतिशत ट्रान्जिट शुल्क देना पड़ रहा है। जिसकी वजह से पूरा व्यापार चौपट होने की कगार पर आ कर खड़ा हो चुका है। वहीं विरोध में शामिल अन्य व्यापारियों का कहना है कि जीएसटी कानून लागू होने से पहले 14 प्रतिशत टैक्स था लेकिन अब 18 प्रतिशत के तहत वसूली की जा रही है जिसकी वजह से आगे आने वाला समय देश के टिम्बर व्यापार पर खासा फर्क देखने को मिलेगा। 

स्वर्ण मंदिर के लंगर को जीएसटी से मुक्त करने की मांग
वहीं दूसरी तरफ अब धर्म और आस्था के प्रतीक मंदिरों में भी जीएसटी के विरोध दिखने लगे हैं। जिसकी कड़ी में गुमटी गुरुद्वारा के बाहर उत्तर प्रदेश उद्योग व्यापार संगठन ने एक अनोखा प्रदर्शन किया। लोगों ने हाथों में रोटी लेकर प्रधानमंत्री से स्वर्ण मंदिर में चलने वाले लंगर की खाद्य सामग्री को जीएसटी से मुक्त करने की भी मांग की। मंडल अध्यक्ष अभिमन्यू गुप्ता का कहना है कि लंगर तो मानवता का काम होता है। इसलिए हमारी सरकार से अपील है कि अमृतसर लंगर की खाद्य सामग्री से जीएसटी को मुक्त रखा जाए ताकि लंगर पर कोई असर ना पड़े और ना ही कोई गरीब भूखा रहे। 

जीएसटी लागू होने से पहले और बाद में अब तक हुए विरोध प्रदर्शन से सरकार को कोई फर्क नहीं पड़ा है लेकिन व्यापार में लगातार देखे जा रहे भ्रम की स्तिथितियों से विरोध की आग जलाये व्यापारियों की वजह से जनता की जेब में जरूर फर्क देखा जा रहा है।
 



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