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दो सौ साल बाद डाट काली पर नई सुरंग

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दो सौ साल बाद डाट काली पर नई सुरंगदो सौ साल बाद डाट काली पर नई सुरंगदो सौ साल बाद डाट काली पर नई सुरंग

देहरादून/ब्यूरो। लोहड़ी की रात  मां डाट काली की ओर से उत्तराखंड और उप्र के लोगों को जाम से मुक्ति की एक बहुत बड़ी सौगात मिली। देहरादून और दिल्ली के बीच हमेशा से एक बहुत बड़ी बाधा डाट काली टनल के रूप में रही है।

 

संकरे रास्ते से वाहनों का गुजरना समय और पैसा दोनों को नुकसान पहुंचाता रहा है। लेकिन अब 13 जनवरी की रात पुरानी सुरंग के बगल पर बन रही घोड़े की नाल की आकृति की नई सुरंग पहाड़ के अंदर आर-पार हो गई है और अपेक्षा की जा रही है कि कुछ ही माह में इस टनल के जरिए यातायात सुचारु हो जाएगा। इस टनल से एक साथ दो वाहन विपरीत दिशाओं में आ जा सकते हैं।

 

देहरादून और सहारनपुर जिले को जोड़ती सड़क में डाट काली मंदिर के पास पुरानी टनल कई तरह के व्यवधान खड़े करती थी। लेकिन इस टनल के विकल्प के बारे में सोचा नहीं जा सका। नेशनल हाइवे रूड़की खंड ने आखिर इस टनल पर काम करना शुरू किया। अब इस टनल का काम आखिरी पड़ाव पर है। सहायक अभियंता डी.सी. नौटियाल का कहना है कि  इस टनल के निर्माण की प्रक्रिया में काफी दिक्कत आई ।

 

लेकिन यह काम समय से काफी पहले पूरा होने की संभावना हो गई है। 330 मीटर की इस टनल का बनना काफी महत्वपूर्ण है। खासकर देहरादून से सहारनपुर जिला और देश के दूसरे भागों से जुडऩे के लिए यह मार्ग काफी महत्व रखता है। यही नहीं व्यापार के स्तर पर भी इस मार्ग का महत्व है। लेकिन इस मार्ग में पुरानी टनल का संकरा होना एक व्यवधान पैदा करता था। जिससे कई बार यात्रा में रुकावट आती थी। कई बार घंटों जाम लग जाता था। 

 

अब इस टनल का काम को लगभग अंतिम रूप दिया जा रहा है। करीब 52 करोड़ की लागत की यह अपनी तरह की राज्य की पहली टनल है। इसका पूरी तरह परीक्षण किया गया है। इस टनल के बन जाने से यातायात सुगम हो जाएगा।  उन्होंने कहा कि वन विभाग के साथ बातचीत का एक लंबा दौर चला है। लेकिन अब लगभग सभी औपचारिकता पूरी कर दी गई है। यह टनल ईपीसी के तहत तैयार की जा रही है।

 

अधिशासी अभियंता शैलेंद्र मिस्रा ने बताया कि इस टनल के बनने के बाद भी पुरानी टनल का अपना अस्तित्व और महत्व बना रहेगा। देहरादून की तरफ से डाट काली मंदिर जाने के लिए भी वह मार्ग के तौर पर उपयोग में लाई जाती रहेगी। 11 मीटर चौड़ी टनल में दोनों तरफ से वाहन चलने से मार्ग अवरुद्ध नहीं होगा। 

 

 डाट काली मंदिर के पास बनी पहली टनल 1821 - 23 के बीच  दून के तात्कालीन  असिस्टेंट सुपरिटेंडेंट  एफजे शोर ने कराया था। तब सहारनपुर जिले को राजपुर मसूरी से जोड़ने के लिए  इसका निर्माण कराया गया था।



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