गोरखपुर कांड में 'हीरो' बनकर उभरे डा.कफील की सामने आई चौंकाने वाली सच्चाई

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गोरखपुर कांड में 'हीरो' बनकर उभरे डा.कफील की सामने आई चौंकाने वाली सच्चाईगोरखपुर कांड में 'हीरो' बनकर उभरे डा.कफील की सामने आई चौंकाने वाली सच्चाईगोरखपुर कांड में 'हीरो' बनकर उभरे डा.कफील की सामने आई चौंकाने वाली सच्चाई

इलाहाबाद: बाबा राघवदास मेडिकल कालेज के बाल रोग विभाग के नोडल आफिसर डा कफील खान को कल रात उनके पद से हटा दिया गया। कफील को पहले उनके काम के लिये हीरो बनाया गया था लेकिन अब वह जीरो हो गये है। मीडिया ने उन्हें पहले बच्चों की जान बचाने के लिये गैस सिलेंडर का इंतजाम करने वाला एक अच्छा व्यक्ति बताया था लेकिन अचानक वह विलेन हो गये और अधिकारियों ने उन्हें उनके पद से हटा दिया।
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जानकारी मुताबिक डॉ कफील बीआरडी मेडिकल कॉलेज के इन्सेफेलाइटिस डिपार्टमेंट के चीफ नोडल ऑफिसर हैं लेकिन वो मेडिकल कॉलेज से ज्यादा अपनी प्राइवेट प्रैक्टिस के लिए जाने जाते हैं। कफील पर आरोप है कि वो अस्पताल से ऑक्सीजन सिलेंडर चुराकर अपने निजी क्लीनिक पर इस्तेमाल किया करता थे।  बताया यह भी जा रहा है कि इस सारे हादसे में खुद को सुर्खियों में लाने के लिए उन्होंने अपने पत्रकार दोस्तों की मदद ली। 
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वहीं मेडिकल कॉलेज के कई कर्मचारियों और डॉक्टरों ने बताया कि वह डॉक्टर कफील वहां होने वाली हर खरीद में कमीशन लेता था और उसका एक तय हिस्सा प्रिंसिपल राजीव मिश्रा तक पहुंचाता था। कर्मचारियों के मुताबिक 11 अगस्त को जब बच्चों की मौत की खबर पर हंगामा मचा तो कफील अपने प्राइवेट अस्पताल में थे। वहां से उन्होंने कुछ सिलेंडरों को अस्पताल भिजवा दिया। क्योंकि ये वो सिलेंडर थे जो वो खुद मेडिकल कॉलेज से चोरी करके ले गए थे। सभी का कहना था कि डॉक्टर राजीव मिश्रा, उनकी पत्नी पूर्णिमा शुक्ला और डॉ. कफील अहमद की वजह से यह दर्दनाक हादसा हुआ है। 
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डॉ. कफील खान के सुर्खियों में आने के बाद उनके खिलाफ 2015 में लगे एक रेप के आरोप की चर्चा भी शुरू हो गई है। इस मामले में केस भी दर्ज हुआ था, लेकिन पुलिस ने जांच के बाद अपनी फाइनल रिपोर्ट में आरोप को झूठा बता कर खारिज कर दिया था।
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