नम आंखों से वीर शहीदों की राह तक रहा है गाजीपुर

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गाजीपुर: उत्तर प्रदेश के गाजीपुर में हजारों नम आखें अपने उन दो वीर सपूतों की राह ताक रही हैं जिन्होने देश की रक्षा की खातिर जमू कश्मीर के माछिल सेक्टर में अपनी जान न्यौछावर कर दी। पिछले मंगलवार को सीजफायर का उल्लघंन कर पाकिस्तानी सेना के कायराना हमले में नियंत्रण रेखा पर गश्त के दौरान तीन सैनिक शहीद हो गये थे जिनमें मनोज कुमार कुशवाहा और शंशाक सिंह गाजीपुर जिले के निवासी है। दोनो जाबांजों के पार्थिव शरीर आज शाम तक यहां पहुंचने के आसार है। बिरनो क्षेत्र में बद्धोपुर गांव स्थित मनोज कुशवाहा के पैतृक आवास में सांत्वना देने वालों का तांता लगा हुआ है वहीं कासिमाबाद क्षेत्र में नसीरुद्दीनपुर के रहने वाले शशांक सिंह के परिजन पथराई आखों से अपने लाल का इंतजार कर रहे हैं। दोनों शहीदों के गांवों में मातम पसरा हुआ है। सन्नाटे के बीच रह रह कर विलाप के स्वर उभर कर थम जाते हैं। गांव में पिछले दो दिनो से चूल्हे की आग ठंडी पड़ी हुयी है। लोगबाग अपने बच्चों की भूख घर में रखी बनी बनायी खाद्य सामग्री से मिटा रहे हैं। 

पुलिस अधीक्षक अरविंद सेन ने Þयूनीवार्ताÞ से कहा कि आज दोपहर बाद दोनों शहीदों के पार्थिव शरीर उनके घर लाये जाने के आसार हैं। उधर जिलाधिकारी संजय कुमार खत्री ने शहीदों के घर पहुंचकर परिवारीजनों का ढांढ़स बंधाया।  24 वर्षीय शंशाक सिंह वर्ष 2010 में सेना की राजपूताना राइफल में नियुक्त हुये थे। इन दिनों उनकी तैनाती 57 राष्ट्रीय राइफल में कश्मीर में थी। परिजनों के मुताबिक वह जुलाई में छुट्टी में घर आए थे। वह अभी अविवाहित थे मगर उनके लिये विवाह के प्रस्ताव लगातार आ रहे थे। उनके बड़े भाई हिमांशु सिंह भी फौजी हैं और उनकी तैनाती भी कश्मीर में ही है।  बद्धोपुर गांव में मनोज कुमार कुशवाहा (31) के घर से चीत्कार ही सुनाई पड़ रही है। पत्नी मंजू देवी और मां शीला देवी का रो रो कर बुरा हाल है। वह सेना में वर्ष 2002 में भर्ती हुए थे। 20 अगस्त को छुट्टी पर घर आए थे हालांकि पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर में सीमित सैन्य कार्रवाई (सर्जिकल स्ट्राइक) के बाद उन्हें 28 अगस्त को सीमा पर बुला लिया गया। 

शहीद के भाई बृजमोहन ने बताया ‘शहादत से कुछ घंटे पहले मनोज ने मुझसे फोन पर बात की थी। उसने कहा थे कि वह दो-चार दिन में छुट्टी लेकर घर आयेगा। पिछले साल बहन प्रिया की शादी में लिए कर्ज को भी अदा करेगा। उसकी इच्छा थी कि छुट्टी में घर आकर मकान का अधूरा पड़ा काम को पूरा कराये मगर अरमान धरे के धरे रह गए।’  मनोज के बेटे मानव और पुत्री मुस्कान ग्रामीणों की भीड और परिजनों के विलाप से गुमसुुम हैं। 

गाजीपुर में शहीद मनोज के घर पहुंचे राजपूत रेजिमेंट के लांसनायक रवि प्रताप सिंह ने बताया कि मनोज कुमार और शशांक सिंह एक ही साथ रहते थे। दोनों ड्यूटी से खाली होने के बाद साथ बाजार जाते। साथ भोजन करते। दोनो की गहरी दोस्ती की चर्चा रेजीमेंट में हमेशा रहती थी।  उधर, शहीदों के घर पर सांत्वना देने वालों का तांता लगा हुआ है। राजनेता और अधिकारी शहीद के परिजनों को ढांढस बंधा रहे हैं।

 इसी क्रम में कल शहीद मनोज के पिता का ढांढस बंधाने पुलिस क्षेत्राधिकारी हृदयानंद के अलावा भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के वरिष्ठ नेता कुंवर रमेश सिंह पप्पू भी पहुंचे थे। विधान परिषद सदस्य (एमएलसी) श्री चंचल अपना एक माह का एक लाख रुपये का वेतन दोनों परिवारों को मदद के रूप में देंगे। साथ ही उनके गांवों में शहीद स्तंभ अथवा शहीद द्वार का अपनी निधि से निर्माण कराएंगे। दोनों गांवों में सोलर लाइट लगेगी। शोक जताने पूर्व मंत्री शादाब फातिमा के अलावा सपा नेता डॉ.ब्रजभान सिंह बघेल, ब्रजेंद्र सिंह शहीद के घर पहुंचे थे। 

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