राजनीति में छाए राम और कृष्ण, योगी से पहले अखिलेश लगवाएंगे कृष्ण की 51 फीट ऊंची प्रतिमा

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राजनीति में छाए राम और कृष्ण, योगी से पहले अखिलेश लगवाएंगे कृष्ण की 51 फीट ऊंची प्रतिमाराजनीति में छाए राम और कृष्ण, योगी से पहले अखिलेश लगवाएंगे कृष्ण की 51 फीट ऊंची प्रतिमाराजनीति में छाए राम और कृष्ण, योगी से पहले अखिलेश लगवाएंगे कृष्ण की 51 फीट ऊंची प्रतिमा

लखनऊः वैसे तो यूपी की सत्ता पर काबिज बीजेपी आए दिन धर्म के नाम पर राजनीति करने के आरोप में विपक्ष के निशाने पर रहती ही है, लेकिन इस बार समाजवादी पार्टी भी धर्म के नाम पर कीर्तिमान रचने की तैयारी में है। एक तरफ जहां मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने अयोध्या में सरयू नदी के तट पर 100 फीट ऊंची भगवान राम की प्रतिमा लगवाने का एलान किया है, तो वहीं समाजवादी पार्टी भी सैफई में अपने स्कूल में 51 फीट ऊंची और 60 टन वजनी भगवान कृष्ण की मूर्ति लगवाने जा रही है।

6 करोड़ 32 लाख की लागत से बनकर तैयार
बता दें भगवान श्री कृष्ण की यह भव्य मूर्ति 6 करोड़ 32 लाख के बजट से लगभग बनकर तैयार हो चुकी है। दावा है कि यह देश में कृष्ण की सबसे बड़ी मूर्ति होगी। गुपचुप तरीके से इसे पिछले 6 महीने से बनाया जा रहा है।

'रथ-पाणी' मुद्रा में दिखेंगे भगवान कृष्ण
जानकारी के मुताबिक इस मूर्ति में भगवान कृष्ण की 'रथ-पाणी' मुद्रा को दिखाया गया है। जिसमें भीष्म पितामाह पर क्रोधित होकर कृष्ण शस्त्र न उठाने की अपनी प्रतिज्ञा भी तोड़ देते हैं। मूर्ति के आसपास के कुरुक्षेत्र का रूप दिया जाएगा।

15 जनवरी को हो सकता है इनॉगरेशन
मूर्ति को बनाने में 35 टन तांबा और 25 टन स्टील का स्टील का इस्तेमाल किया गया है। इसके लिए स्टील जापान से मंगवाया गया। कृष्ण के हाथ में जो चक्र है, उसका वजन करीब 7 टन का है। इस मूर्ति को पूरी तरह से ढंककर रखा गया है, क्योंकि इसका प्लेटफार्म तैयार होने में अभी 4 महीने लगेंगे। वहीं इंजीनियर्स का कहना है कि मूर्ति की स्थापना 15 जनवरी को हो जाएगी, लेकिन इसका इनॉगरेशन स्कूल खुलने के बाद ही किया जाएगा।

US के आर्टिस्ट ने बनाई मूर्ति
बता दें मूर्ति को बनाने के लिए अमेरिका से आर्टिस्ट को बुलाया गया है, जिसमें प्राची प्रताप, प्रशांत प्रताप और एडवर्ट ब्रथेट शामिल हैं। इन्हीं तीनों मूर्तिकारों ने जनेश्वर मिश्र पार्क में मौजूद जनेश्वर की मूर्ति को बनाया था। 2012 से ये सभी समाजवादी पार्टी से जुड़े हुए हैं।

उल्लेखनीय है कि प्रदेश में इस समय यादव एक बहुसंख्यक समाज है। ऐसे में आस्था और धर्म के नाम पर यूपी में राजनीतिक रोटियां सेंकी जा रही है।


 



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